Wednesday, May 20, 2020

रावतसर दुर्ग में 19 राजाओं ने राज किया, लगभग 434 साल से राज परिवार ही कर रहा संभाल, 270 साल से निकल रही गणगौर की सवा

रावतसर दुर्ग में 19 राजाओं ने राज किया, लगभग 434 साल से राज परिवार ही कर रहा संभाल, 270 साल से निकल रही गणगौर की सवारी
प्रदेश के कई जिलों की हनुमानगढ़ जिले के  शहर  रावतसर में भी दुर्ग है, लेकिन बहुत कम लोग यह जानते हैं कि इसकी सार-संभाल आज भी राजा-महाराजा की पीढ़ियों के लोग ही कर रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि रावतसर शहर  में यह दुर्ग लगभग 434 साल पहले बना था और आज भी यह सिलसिला जारी है। यही कारण है कि रावतसर के वार्ड आठ में यह ऐतिहासिक दुर्ग जिले के इतिहास और वैभव की गाथा बताता है। यह दुर्ग राजा विजयसिंह ने 17वीं शताब्दी में बनवाया था। इससे पहले रावत राधोदास ने 1584 में यहां चूने का गढ़ बनवाया था। उसके बाद से लेकर अब तक 19 राजाओं ने यहां राज किया। खास बात ये है कि अब भी इसकी देखभाल करने के लिए राजा-महाराजाओं के वशंज हर दो साल बाद यहां आते हैं और कई दिन यहां रुकते हैं। इस दुर्ग के पहले शासक रावत राधोदास थे और अंतिम रावत तेजसिंह थे। इसके बाद अब राजा तेजसिंह के बेटे बलभद्रसिंह राठौड़ (सेवानिवृत्त आईपीएस) इसकी देखभाल करते हैं। खास बात ये भी है कि 270 सालों से इस दुर्ग से गणगौर की शाही सवारी निकाली जा रही है। सबसे बड़ी बात ये है कि सबसे पुराने भटनेर किले की देखरेख भी रावतसर के शासकों ने की थी। यह दुर्ग करीब 12 बीघा में फैला है। फिलहाल इसकी देखभाल का जिम्मा गुरुचरण सिंह कामगार को दे रखा है।



दुर्ग में बना है पूर्व प्रधानमंत्री वीपीसिंह का संग्रहालय... विदेशों में मिले कीमती उपहार बढ़ा रहे इसकी शान
रावतसर के दुर्ग में बने संग्रहालय में पूर्व प्रधानमंत्री वीपीसिंह की लगी प्रतिमा।

संग्रहालय में रखी गई ये वे घरेलू वस्तुएं हैं, जो पूर्व प्रधानमंत्री वीपीसिंह को उपहार में मिली थीं। सभी इसी संग्रहालय में रखी हैं।

परंपरा...आज भी गाजे-बाजे से निकलती है सवारी
इस दुर्ग की एक खासियत ये भी है कि स्थापना से लेकर अब तक यहां से गणगौर की बड़ी सवारी गाजे-बाजे के साथ निकलती है। जिसे 270 साल हो चुके हैं, जो अब भी जारी है। इसमें पूरा रावतसर कस्बा और महाराजा के वशंज शिरकत करते हैं।

वीपीसिंह जब प्रधानमंत्री थे, तब यह नाव उपहार स्वरूप उन्हें विदेशी दौरे में मिली थी। लोग इस नाव के साथ खूब फोटो खिंचाते हैं।

इस वंश की बहू रानी लक्ष्मीकुमार चुड़ावत, जो अंतिम शासक रावत तेजसिंह की पीढ़ी भी यह दुर्ग खास पहचान रखता है। वह विधानसभा अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष और राज्य सभा सदस्य रही हैं। राजघराने की पहली ऐसी महिला थी जो राजस्थानी की प्रख्यात साहित्यकार के रूप में जानी जाती थी

Friday, May 15, 2020

आज वित्त मंत्री जी द्वारा 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज की घोषणाओं It is the third day of FM’s announcements about Rs 20 lakh crore

आज वित्त मंत्री जी द्वारा 20 लाख करोड़ के राहत पैकेज की घोषणाओं का तीसरा दिन है। पहला कार्य जो वित्त मंत्री जी को करना चाहिए था वो यह होता कि पैकेज से संबंधित राशि, संख्या का ब्रेकअप दिया जाता। यह पारदर्शिता, स्पष्टता एवं इसके impact को समझने के लिए ज़रूरी है।
राज्यों को कोई वित्तीय सहायता नहीं दी गई है जबकि कोविड-19 से लड़ाई, लॉकडाउन को लागू करना, प्रवासियों, मज़दूरों एवं गरीबों को राहत का सारा खर्चा राज्यों द्वारा वहन किया गया है।
जब जीडीपी गहरी मंदी की चपेट में है एवं पूर्वानुमान है कि इस साल यह -3 % हो सकती है, 14 करोड़ से ज़्यादा लोगों की नौकरियां चली गई हैं, काफी बड़ी संख्या में लोग भुखमरी के कगार पर हैं, भारत सरकार ने ऐसा पैकेज दिया है जिसका 90% बैंक लोन के रूप में है।
यह स्पष्ट है कि इस पैकेज में भूमिहीन किसान एवं शहरी गरीब के लिए कुछ नहीं है।
It is the third day of FM’s announcements about Rs 20 lakh crore rescue package. The first thing the FM should have done was to give a complete break-up of the numbers, figures, details regarding the package. It is important for transparency, clarity & for understanding the impact.
States have not been given any financial assistance even though the entire expenditure on fighting #COVID19, enforcing #lockdown, providing support to migrants, labours and relief to the poorest has had to be borne by states.
When the GDP is dipping into deep recession and is predicted to grow at -3 % this year, more than 14 crore people have lost jobs , large number of people are living at near starvation level, Govt of India has given a package 90% of which is in the form of Bank loans.
It is clear that there is nothing for the landless labours and the Urban poor in these package

करीब दो माह से चल रहे लॉकडाउन की पीड़ा झेल रहे प्रवासियों एवं श्रमिकों को

करीब दो माह से चल रहे लॉकडाउन की पीड़ा झेल रहे प्रवासियों एवं श्रमिकों को संबल देने के लिए क्वारेंटीन शिविरों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाना हम सबकी जिम्मेदारी है। अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे श्रमिकों की तकलीफ को समझें और क्वारेंटीन सेंटरों में रह रहे इन श्रमिकों के लिए बेस्ट प्रैक्टिसेज लागू करें, ताकि संकट की इस घड़ी में उन्हें राहत मिल सके। ग्राम स्तरीय क्वारेंटाइन समितियों तक भी इन नवाचारों को पहुंचाया जाए।
निवास पर प्रवासियों के सुरक्षित आवागमन, क्वारेंटीन एवं शिविरों की व्यवस्था को लेकर उच्च स्तरीय बैठक में समीक्षा की। लोगों के जीवन की रक्षा करना और मुसीबत के समय में प्रवासियों की पीड़ा को कम करना हमारा ध्येय होना चाहिए। अधिकारी इसकी गहन मॉनिटरिंग करें कि क्वारेंटीन सेंटरों और शिविरों में श्रमिकों को किसी परेशानी का सामना नहीं करना पडे़।
निर्देश दिए कि हॉट-स्पॉट और कर्फ्यू एरिया को छोड़कर प्रदेश में एक जिले से दूसरे जिले में जाने वाले व्यक्तियों को 14 दिन के लिए क्वारेंटीन नहीं किया जाए। केवल उन्हीं लोगों को क्वारेंटीन करें, जिनमें सर्दी, खांसी या जुकाम (आईएलआई) के लक्षण पाए जाएं। यह भी निर्देश दिए कि सीमावर्ती जिलों के औद्योगिक क्षेत्रों जैसे भिवाड़ी, नीमराणा आदि में प्रतिदिन व्यावसायिक गतिविधियों के लिए आने वाले दूसरे राज्यों के उद्यमियों एवं श्रमिकों को भी क्वारेंटीन नहीं किया जाए।

लोगों ने मास्क लगाने को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया है, यह अच्छा संकेत है। लोगों में कोरोना को लेकर अब जागरूकता आने लगी है। इससे ही हम लॉकडाउन में और अधिक छूट देने तथा जीवन रक्षा के लिए तैयार हो सकेंगे। लोगों के ये सकारात्मक प्रयास ही इस लड़ाई से जीतने में मददगार होंगे।

RTE निशुल्क शिक्षा एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 (आरटीई एक्ट

निशुल्क शिक्षा एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 (आरटीई एक्ट) के तहत प्रदेश के गैर सरकारी विद्यालयों में 25 प्रतिशत सीटों पर दुर्बल वर्ग एवं असुविधाग्रस्त समूह के निशुल्क प्रवेश के लिए अभिभावकों की वार्षिक आय सीमा एक लाख रूपए के स्थान पर ढाई लाख रूपए करने को मंजूरी दी है।
इस स्वीकृति से प्रदेश में शिक्षा का अधिकार अधिनियम की भावना को मजबूती मिलेगी। आय सीमा बढ़ाने से दुर्बल वर्ग और असुविधाग्रस्त समूह के और अधिक बच्चे गैर सरकारी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश पा सकेंगे। इस निर्णय से बड़ी संख्या में इस वर्ग के वे बच्चे भी बड़े एवं नामी निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे जो गत सरकार द्वारा अभिभावकों की आय सीमा ढ़ाई लाख रूपए सालाना से घटाकर एक लाख रूपए करने के कारण वंचित हो गए थे।

उल्लेखनीय है कि बीते दिनों शिक्षा विभाग की वीडियो कांफ्रेंस में इस बात पर बल दिया था कि निशुल्क शिक्षा एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम की भावना के अनुरूप जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को लाभ दिए जाने की जरूरत है। यह चिंतनीय है कि अभिभावकों की आय सीमा घटाने के फैसले के कारण जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को गैर सरकारी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा ग्रहण करने का अवसर नहीं मिल पा रहा है, जो कि इस अधिनियम की मूल भावना के विपरीत है।

Sunday, May 10, 2020

पल्लू ka itihas in hindiहनुमानगढ़ pallu hanumangarh

पल्लू का इतिहास



पल्लू राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में रावतसर तहसील का एक गांव है। यह जंगल देश के सिहाग जाटों का ठिकाना था।
कहा जाता है कि पहले इसका नाम कोट कल्लूर था, जो बाद में इस ठिकाने के जाट सरदार की लड़की के नाम पर पल्लू हो गया।
पल्लू के बारे में एक कथा प्रचलित है कि मूगंधड़का नामक जाट का कोट कल्लूर पर अधिकर था। उसने डरकर दिल्ली के साहब नामक शहजादे से अपनी बेटी पल्लू का विवाह कर दिया। लेकिन वह मन से नहीं चाहता था, अतः उसने अपने दामाद को भोजन में विष दे दिया जो अपने महल में जाकर मर गया। कुछ देर बाद जाटने अपने बेटे को पता लगाने के लिए भेजा कि साहब मर गया या नहीं। उसने जैसे ही महल की खिड़की में मुंह डाला, क्रुद्ध पल्लू ने उसका सिर काट लिया और उसकी लाश को महल में छुपा लिया। इस प्रकार बारी-बारी से उसने पांचो भाइयों को मार दिया, इस पर जाट ने कहा -
          जावै सो आवै नहीं, यो ही बड़ो हिलूर (फितूर)।
          के गिटगी पल्लू पापणी, के गिटगो कोट किलूर ।।

Friday, May 1, 2020

समर्थन मूल्य पर खरीद की खास बातें

समर्थन मूल्य पर खरीद की खास बातें 





समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के लिए किसान को अपना मोबाइल नंबर देना होगा। एक मोबाइल नंबर पर एक किसान का पंजीयन किया जाएगा।
  • इस बार मोबाइल ओटीपी का विकल्प स्वीकार नहीं है।
  • पंजीयन का कार्य सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक होगा।
  • किसान की कृषि भूमि जिस तहसील में होगी, उसी तहसील के कार्यक्षेत्र में आने वाले खरीद केंद्र का चयन रजिस्ट्रेशन के दौरान कर सकेगा।
  • किसान को पंजीकरण दिनांक के आधार पर सॉफ्टवेयर द्वारा वरीयता के अनुसार तुलाई हेतु दिनांक तथा जिंस की मात्रा का आवंटन किया जाएगा। इसकी सूचना किसान के पंजीकृत मोबाइल पर एसएमएस द्वारा दी जाएगी। 
  • किसान को भामाशाह कार्ड से संबद्ध बैंक खाते का विवरण जांच लेना चाहिए। यदि कार्ड में बैंक खाते का गलत विवरण दर्ज है तो रजिस्ट्रेशन से पूर्व उसे दुरुस्त करवा लेना चाहिए।
  • रजिस्ट्रेशन के समय बैंक खाता संख्या का विवरण सही ढंग से अपलोड करवाए ताकि भुगतान में किसान को परेशानी नहीं हो।
  • तुलाई के समय किसी प्रकार की असुविधा से बचने के लिए उपज को तय एफएक्यू मापदंडों से तैयार कराकर बेचने के लिए लानी चाहिए। 

समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए हैल्पलाइन/टोल फ्री नंबर

समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए हैल्पलाइन/टोल फ्री नंबर





किसानों को ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, उपज के बेचाव व भुगतान आदि के संबंध में किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए वे टोल फ्री नंबर 1800 1806 001 पर फोन कर समस्या का समाधान प्राप्त कर सकते हैं।

रबी फसल का समर्थन मूल्य (2020-21) / समर्थन मूल्य

रबी फसल का समर्थन मूल्य (2020-21) / समर्थन मूल्य घोषित





फसल
उत्पादन लागत
समर्थन मूल्य
चना
2801
4875
सरसों
2323
4425
गेहूं
923
1925
जौ
919
1525
मसूर
2727
4800

समर्थन मूल्य पर चना व सरसों बेचने के लिए किसान को पंजीयन कराते समय कुछ आवश्यक दस्तावेज जमा कराने होंगे। ये दस्तावेज इस प्रकार हैं

समर्थन मूल्य पर चना व सरसों बेचने के लिए किसान को पंजीयन कराते समय कुछ आवश्यक दस्तावेज जमा कराने होंगे। ये दस्तावेज इस प्रकार हैं

  1. आधार कार्ड/जन आधार कार्ड
  2. भामाशाह कार्ड
  3. फसल संबंधी दस्तावेज के लिए गिरदावरी
  4. बैंक पासबुक की फोटोकॉपी
  5. गिरदावरी के पी-35 का क्रमांक व दिनांक

AADHAR CARD KA PASSWARD KYA HAI आधार कार्ड का पासवर्ड क्या है ई-आधार पासवर्ड

 AADHAR CARD KA PASSWARD KYA HAI आधार कार्ड का पासवर्ड क्या है  ई-आधार पासवर्ड   आपका ई-आधार पासवर्ड 7/8 अक्षरों का होगा। यदि आपके नाम में 3...