गणतंत्र दिवस पर कविता – 26 जनवरी पर कविता हिंदी में

जब-जब लोकतंत्र से जयचन्दों को अभयदान मिलेगा,
तब-तब भारत माता असहनीय दुःख पायेगा,
जब-जब न्याय अमीरों की जागीर बनेगा,
तब-तब गरीब मुजरिम ठहराया जायेगा,
जब-जब मिडिया टीआरपी की भूखी होगी,
तब-तब अर्धसत्य दिखाया जाएगा,
जब-जब फिल्में अश्लीलता परोसेंगी,
तब-तब कई ज़िंदगियाँ तबाह होंगा ,
जब जब इतिहासकार मुगलों की जयकार करेंगे,
तब-तब युवा दिग्भ्रमित होगा,
जब-जब साहित्य समाज में विष घोलेगा,
तब-तब भारत का पतन होगा,
जब-जब शिक्षा से नैतिकता गायब होगी,
तब-तब अगली पीढ़ी नालायक होगी,
जब-जब किसान खून की आँसू रोयेंगे,
तब-तब महंगाई सबको रुलाएगी,
जब-जब तथाकथित बुद्धिजीवी समाज को भटकाना चाहेंगे,
तब-तब राष्ट्रभक्त उन्हें धूल चटाएंगे,
जब-जब लोग अपने कर्तव्यों को भूलेंगे,
तब-तब अधिकार राष्ट्र के लिए घातक होगा,
जब-जब योग्य, लेकिन चरित्रहीन लोग, युवाओं के आदर्श बनेंगे,
तब-तब नई पीढ़ी के चरित्र का भी घोर पतन होगा,
देशभक्तों, घोर निंद्रा अब तो त्यागो,
इससे पहले की राष्ट्र खंडित-खंडित हो जाए,
खड़े सैनिक सीमा पर, देश के लिए मरने को,
जरा भी गैरत बची हो तुममें, तो तुम देश के लिए जियो तो सही…

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