जब-जब लोकतंत्र से जयचन्दों को अभयदान मिलेगा, तब-तब भारत माता असहनीय दुःख पायेगा, जब-जब न्याय अमीरों की जागीर बनेगा, तब-तब गरीब मुजरिम ठहराया जायेगा, जब-जब मिडिया टीआरपी की भूखी होगी, तब-तब अर्धसत्य दिखाया जाएगा, जब-जब फिल्में अश्लीलता परोसेंगी, तब-तब कई ज़िंदगियाँ तबाह होंगा , जब जब इतिहासकार मुगलों की जयकार करेंगे, तब-तब युवा दिग्भ्रमित होगा, जब-जब साहित्य समाज में विष घोलेगा, तब-तब भारत का पतन होगा, जब-जब शिक्षा से नैतिकता गायब होगी, तब-तब अगली पीढ़ी नालायक होगी, जब-जब किसान खून की आँसू रोयेंगे, तब-तब महंगाई सबको रुलाएगी, जब-जब तथाकथित बुद्धिजीवी समाज को भटकाना चाहेंगे, तब-तब राष्ट्रभक्त उन्हें धूल चटाएंगे, जब-जब लोग अपने कर्तव्यों को भूलेंगे, तब-तब अधिकार राष्ट्र के लिए घातक होगा, जब-जब योग्य, लेकिन चरित्रहीन लोग, युवाओं के आदर्श बनेंगे, तब-तब नई पीढ़ी के चरित्र का भी घोर पतन होगा, देशभक्तों, घोर निंद्रा अब तो त्यागो, इससे पहले की राष्ट्र खंडित-खंडित हो जाए, खड़े सैनिक सीमा पर, देश के लिए मरने को, जरा भी गैरत बची हो तुममें, तो तुम देश के लिए जियो तो सही…